Economically Weaker Section Reservation Age Limit Relaxation. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर स्थित मुख्य खंडपीठ के मुख्य न्यायाधीश श्री सुरेश कुमार कैत तथा न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ द्वारा दिनांक 24/02/2024 को ईडब्ल्यूएस वर्ग की ओर से आयु सीमा में ओबीसी/एससी/एसटी के समान छूट प्राप्त करने हेतु दायर 20 याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करके निर्णय के लिए याचिकाएँ आरक्षित कर ली गई थी आज उन पर फैसला सुना दिया गया है। हाई कोर्ट ने आयु सीमा में छूट देने की मांग करने वाली सभी याचिकाओं को निरस्त कर दिया है।
EWS पक्ष के वकीलों की दलील
याचिका क्रमांक 14695 ऑफ 2024 (आदित्यनारायण पांडे बनाम भारत सरकार) में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पैरवी की। याचिका क्रमांक डब्ल्यूपी/13333 ऑफ 2023 (आशुतोष चौबे एवं काशी प्रसाद शुक्ला एवं अन्य विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन) एवं डब्ल्यूपी/31536 ऑफ 2023 (प्रदीप कुमार मिश्रा विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन) में वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह, रामेश प्रजापति, शुभंशु कौल ने पक्ष रखा। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट को अवगत कराया कि केंद्रीय भर्तियों में ओबीसी/एससी/एसटी वर्ग को सरकारी नौकरियों में आयु सीमा में छूट प्राप्त है लेकिन ईडब्ल्यूएस वर्ग को भारत सरकार ने छूट नहीं दी है, अतः भारत सरकार को निर्देशित किया जाए कि ईडब्ल्यूएस वर्ग को आयु सीमा में छूट दिए जाने से संबंधित प्रावधान किए जाएँ।
UPSC एवं भारत सरकार के वकीलों की दलील
भारत सरकार का पक्ष रखते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर वरिष्ठ अधिवक्ता संजय तथा पुष्पेंद्र यादव एवं संघ लोक सेवा आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश कौशिक ने कोर्ट को भारत के संविधान के अनुच्छेद 15 एवं 16 के सभी प्रावधानों से अवगत कराया कि ओबीसी/एससी तथा एसटी वर्ग को सामाजिक आरक्षण (सोशल रिजर्वेशन) दिया गया है जबकि ईडब्ल्यूएस (इकोनॉमिकल रिजर्वेशन) अर्थात आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया गया है जिसके कारण ओबीसी/एससी/एसटी के आरक्षण की ईडब्ल्यूएस से कोई समानता नहीं है।
DOPT की गाइडलाइन EOW को आयु सीमा में छूट का प्रावधान नहीं
भारत के 103वें संविधान संशोधन बिल के अध्ययन से स्पष्ट है कि विधायिका का उद्देश्य केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को अधिकतम 10% आरक्षण दिए जाने का प्रावधान किया गया है। भारत सरकार ने 1991 में भी समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10% आरक्षण की व्यवस्था की थी जिसे इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ के मामले में सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संवैधानिक पीठ ने यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि मौजूदा संविधान में आर्थिक आधार पर आरक्षण दिए जाने का प्रावधान नहीं है, इसलिए भारत सरकार ने 103वां संविधान संशोधन करके अनुच्छेद 15(6) तथा 16(6) प्रतिस्थापित किए हैं जिसमें ईडब्ल्यूएस के लिए अधिकतम 10% आरक्षण की व्यवस्था की गई है एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का निर्धारण किए जाने हेतु डीओपीटी ने दिनांक 19 जनवरी 2019 को जारी गाइडलाइन (ऑफिस मेमोरेंडम) जारी किया है, जिसमें आयु सीमा में छूट का कोई प्रावधान नहीं है।
उक्त ईडब्ल्यूएस आरक्षण इनेबलिंग प्रावधान होने के कारण यह एक पॉलिसी मैटर है जिसे पैरिटी के आधार पर माननीय न्यायालय को रिव्यू करने का अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक क्षेत्राधिकार नहीं है।
उक्त समस्त तथ्यों एवं तर्कों को सुनने के बाद सभी मामले अंतिम फैसले हेतु आरक्षित कर लिए गए थे। आज हाईकोर्ट ने अपना जजमेंट जारी करते हुए सरकारी पक्ष के वकीलों की दलीलों के प्रति सहमति व्यक्त की और यह माना कि, EWS को आयु सीमा में छूट दिए जाने का आदेश देने अथवा इसके हेतु सरकार को निर्देश देने का इस न्यायालय को न्यायिक क्षेत्राधिकार नहीं है।
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