मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक सामाजिक कार्यकर्ता की संवेदनशीलता के कारण बालाघाट से आए 66 वर्षीय रिटायर कर्मचारी, अपने परिवार के पास वापस लौट गए हैं। वह अपने दोस्त के साथ भोपाल आए थे। याददाश्त कमजोर होने के कारण भोपाल में भटक गए।
बेटे ने भोपाल में ढूंढा, पुलिस में मामला दर्ज करवाया
दरअसल, भूलने की बीमारी ने बालाघाट के 66 वर्षीय नानूराम पटले को दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर कर दिया। 10 दिन पहले वे एक दोस्त के साथ भोपाल आए। शहर की भीड़ में बिछड़ गए। इसके बाद उनका दस दिनों का संघर्ष शुरू हुआ। बिना किसी सहारे, बिना किसी पहचान के, शहर की सड़कों पर भटकते हुए पेट भरने के लिए उन्होंने भीख तक मांगी। अपने घर, शहर यहां तक कि लोगों को वे भूल बैठे। इधर, पिता की तलाश में बेटा हितेश भटकता रहा। भोपाल के एमपी नगर थाने में गुमशुदगी भी दर्ज कराई।
सामाजिक कार्यकर्ता ने काउंसलिंग की और घर पहुंचा
भोपाल में भटकते बुजुर्ग नानूराम थक-हार कर कटारा रोड पर सड़क के किनारे बैठे थे। तपती धूप में बैठे बुजुर्ग पर जब कुछ समाजसेवियों की नजर पड़ी तो उन्होंने पहले उन्हें भोजन कराया, फिर बातचीत करने पर उन्हें पता चला कि वे बालाघाट से आए थे और घर का रास्ता ही भूल बैठे हैं। समाजिक कार्यकर्ता पारस व उनके साथियों ने नानूराम को आसरा वृद्धाश्रम तक पहुंचाते हुए पुलिस को इसकी खबर दी। इसके बाद बालाघाट और भोपाल पुलिस ने सामंजस्य के साथ बुजुर्ग की पहचान कर उन्हें बेटे हितेश से मिलाया।
विनम्र अनुरोध कृपया हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें। सबसे तेज अपडेट प्राप्त करने के लिए टेलीग्राम चैनल सब्सक्राइब करें एवं हमारे व्हाट्सएप कम्युनिटी ज्वॉइन करें।
भोपाल से संबंधित महत्वपूर्ण समाचार पढ़ने के लिए कृपया स्क्रॉल करके सबसे नीचे POPULAR Category में Bhopal पर क्लिक करें। समाचार, विज्ञापन एवं प्रतिनिधित्व पूछताछ के लिए व्हाट्सएप, टेलीग्राम ईमेल के माध्यम से संपर्क करें।
कृपया गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें यहां क्लिक करें |
टेलीग्राम चैनल सब्सक्राइब करने के लिए यहां क्लिक करें |
व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए यहां क्लिक करें |
X-ट्विटर पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें |