भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री हरेंद्र नारायण, पिछले एक सप्ताह में लगातार तीसरी बार नेताओं से टकराते हुए दिखाई दे रहे हैं। चार दिन पहले एक महत्वपूर्ण मीटिंग में बिना बताए अनुपस्थित हो गए और फिर सांसद आलोक शर्मा का फोन तक रिसीव नहीं किया। फिर विधायक विश्वास सारंग की क्षेत्र में आग लगने पर फायर ब्रिगेड नहीं भेजी। आज एक बार धमाका कर दिया। चुनाव जीत कर आए पार्षद को हटाने का प्रस्ताव भेज दिया।
भोपाल नगर निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण के खिलाफ बजट मीटिंग में हंगामा
पार्षद देवेंद्र भार्गव ने सवाल उठाया कि यह किस नियम में लिखा है कि निगम कमिश्नर को किसी पार्षद को हटाने का अधिकार है। निगम अध्यक्ष सूर्यवंशी ने एमआईसी मेंबर सुषमा बावीसा से नियमों के बारे में पूछा, लेकिन इससे पहले ही भार्गव ने खुद ही जानकारी दे दी। उन्होंने कहा कि केवल संभागायुक्त ही किसी पार्षद को हटा सकते हैं, न कि निगम कमिश्नर। भार्गव ने बताया कि निगम कमिश्नर ने पार्षद अरविंद वर्मा को हटाने का प्रस्ताव रखा था। यह मामला एएचओ और पार्षद के बीच हुई नोकझोंक से जुड़ा था। भार्गव का कहना था कि यदि पार्षद ने कुछ गलत कहा तो जरूर हालात इतने बिगड़े होंगे कि उन्हें ऐसा कहना पड़ा।
उन्होंने नियमों की किताब खोलकर स्पष्ट किया कि पार्षद बनने के लिए व्यक्ति को काफी संघर्ष करना पड़ता है। चुनाव लड़ते-लड़ते उसकी चप्पलें घिस जाती हैं। पार्षद जनता के लिए लगातार मेहनत करता है और ऐसे में निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण ने एक अधिकारी के कहने पर पार्षद को हटाने का प्रस्ताव पेश कर दिया। भार्गव ने जोर देते हुए कहा कि यदि कोई कार्रवाई होनी थी, तो वह दोनों पक्षों पर होनी चाहिए थी।
महापौर की तो कोई वैल्यू ही नहीं है, मीटिंग में निवेदन करती रहीं
होना यह चाहिए था कि नगर निगम कमिश्नर के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया जाता है लेकिन महापौर मल्टी राय, नगर निगम कमिश्नर के सामने निवेदन करते हुए दिखाई दी। उन्होंने कहा कि, यदि किसी पार्षद के खिलाफ शासन को कोई प्रस्ताव भेजना हो, तो पहले एमआईसी या परिषद से चर्चा करें। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारी फोन नहीं उठाते, जो गलत है। पिछली बैठक में भी यह मुद्दा उठा था।
महापौर को थोड़ी देर के लिए गुस्सा आया
महापौर ने साफ किया कि जो एएचओ और जोन अधिकारी पार्षदों की बात नहीं सुनते, उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि हर पार्षद जनता के बीच रहता है और लोग अपनी समस्याओं के लिए सबसे पहले पार्षदों से ही संपर्क करते हैं। जो स्वास्थ्य अधिकारी या जोन अधिकारी पार्षदों और जनता के फोन नहीं उठाते, उनकी सूची तैयार की जाए ताकि उन पर उचित कार्रवाई हो सके।
आसंदी ने निगम कमिश्नर को निर्देश दिए
निगम अध्यक्ष सूर्यवंशी ने आसंदी से निगम कमिश्नर को निर्देश दिया कि वे ऐसी व्यवस्था करें जिससे जनता और पार्षदों की बात को गंभीरता से लिया जाए और समस्याओं का समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार इसी के लिए वेतन देती है और जनप्रतिनिधि भी प्रशासन के काम में सहयोग कर रहे हैं।
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