मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नवरात्रि बड़ी ही धूमधाम से बनाई जाती है। इस बार चैत्र नवरात्रि के अवसर पर ज्यादातर स्कूलों की परीक्षाएं पूरी हो चुकी है। इसलिए मंदिरों में अतिरिक्त उत्साह देखा जा रहा है। हम आपको भोपाल के पांच सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध माता मंदिरों के बारे में जानकारी दे रहे हैं ताकि नवरात्रि के अवसर पर शेष दिनों में आप सभी के दर्शन करके पुण्य लाभ कमा सकें।
काली माता मंदिर
भोपाल शहर का सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यहां काली माता की प्रतिमा विराजमान है। कहा जाता है कि जब भोपाल शहर का अस्तित्व नहीं था तब इस स्थान पर एक छोटी सी मढ़िया हुआ करती थी। आज यहां पर भव्य मंदिर है। इस मंदिर में माता की प्रतिमा के दर्शन का महत्व है। कहते हैं की माता के दर्शन करने वाला मंत्र मुक्त हो जाता है। आनंद में डूब जाता है।
कर्फ्यू वाली माता
यह भोपाल का सबसे आधुनिक और भव्य मंदिर है। इसकी स्थापना सन 1981 में हुई थी। यह मंदिर मां दुर्गा को समर्पित है। यहां जब प्रतिमा की स्थापना की जा रही थी तब विवाद की स्थिति बन गई और लंबी अवधि तक कर्फ्यू के दौरान मां दुर्गा की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा हुई और सरकार सहित सभी संप्रदाय के लोगों ने मंदिर को स्वीकार किया। इसके कारण ही मंदिर का नाम कर्फ्यू वाली माता कहा जाने लगा।
कंकाली माता का मंदिर
रायसेन रोड पर गुदावल गांव में कंकाली माता का मंदिर स्थित है। यह भी अत्यंत प्राचीन माता मंदिर है और पिछले कुछ सालों से मंदिर के भव्य भवन का निर्माण चल रहा है। इस मंदिर में स्थापित काली माता की प्रतिमा की गर्दन झुकी हुई है। यहां पर निसंतान महिलाएं श्रद्धाभाव से यहां उल्टे हाथ लगाती हैं। नवरात्रि के दौरान भारी भीड़ रहती है।
सिद्धिदात्री पहाड़ वाला मंदिर, जीजी बाई मंदिर
कोलार की एक पहाड़ी पर यह मंदिर मां सिद्धिदात्री को समर्पित है। मंदिर की स्थापना लगभग 22 वर्ष पहले ओम प्रकाश नाम के एक संत द्वारा की गई थी। इस मंदिर में बड़ा ही शांत वातावरण भक्तों को आकर्षित कर लेता है। इस मंदिर की बड़ी ही अनूठी परंपरा है। यहां पर भक्त अपनी पादुका (जूते-चप्पल) का समर्पित करते हैं।
सलकनपुर वाली माता
राजस्व विभाग के अनुसार सलकनपुर, सीहोर जिले में स्थित है परंतु भौगोलिक दृष्टि से यह भोपाल के नजदीक है। यह मंदिर बिजासन माता को समर्पित है। पहाड़ी पर स्थित है। यहां माता की प्रतिमा प्राचीन एवं स्वयंभू है। नवरात्रि में सिर्फ भोपाल और नर्मदा पुरम से ही नहीं बल्कि देश भर से माता के भक्त दर्शन के लिए आते हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने जिस प्रकार उज्जैन में महाकाल लोक का निर्माण किया है। इस प्रकार यहां सलकनपुर में माता के दिव्य लोक का निर्माण किया जा रहा है।
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