खून का रिश्ता वाली बात जिसमें एक भाई, दूसरे भाई की जान बचाने के लिए, अपनी जान दाव पर लगा दे, इंसानों में बहुत कम देखने को मिलती है परंतु आज भोपाल में दो बाघों के बीच में खून का मजबूत रिश्ता दिखाई दिया। जब एक टाइगर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के बिछाए हुए जाल में फंस गया तो दूसरे टाइगर ने भी सरेंडर कर दिया।डीएफओ इस कहानी को ऐसे सुन रहे हैं मानो उन्होंने दोनों टाइगर्स को दंगल में पछाड़कर काबू किया है। रेंजर की कहानी सुनने से लगता है कि, उन्होंने जंगल में सिंघम की तरह दौड़कर टाइगर को चांटा मारा और टाइगर चुपचाप पिंजरे में जाकर बैठ गया, लेकिन असली कहानी कुछ और है।
दो बाघों भाइयों के खून के रिश्ते की सच्ची कहानी
यह दोनों टाइगर, सतपुड़ा से आए थे। रिश्ते में दोनों सगे भाई हैं। इन दोनों ने पिछले कुछ दिनों से भोजपुर, मंडीदीप और बंगरसिया के बीच वाले जंगल पर कब्जा कर लिया था। जबकि यह तीनों गांव के बीच का आम रास्ता भी है। टाइगर के जंगल में आ जाने के कारण गांव वालों को जंगल के अंदर जाने में डर लगने लगा था। तो उन्होंने वन विभाग वालों को बताया। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट वालों ने जंगल में एक पिंजरा लगा दिया। यह बिल्कुल वैसी ही प्रक्रिया है जैसे चूहे को पकड़ने के लिए घर में पिंजरा लगाया जाता है। दोनों में से एक टाइगर सोमवार को फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के पिंजरे में फंस गया। गांव वालों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। वन विभाग के अधिकारियों की भीड़ आ गई। दोनों टाइगर रिजर्व में पैदा हुए और बड़े हुए हैं इसलिए वन विभाग वालों को जानते हैं। स्वतंत्र बचे टाइगर को पता था कि, वन विभाग वाले उनकी आजादी और उनके प्राकृतिक अधिकारों की परवाह नहीं करेंगे। पता नहीं उसके भाई के साथ क्या करेंगे इसलिए उसने खुद सरेंडर कर दिया। वन विभाग वालों ने दोनों को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, वापस भेज दिया है।
क्या बाघ सचमुच इमोशनल होते हैं
हमारी रिसर्च बताती है कि टाइगर्स में भावनाए होती है। वह अपने खून के रिश्ते के प्रति भावनात्मक बंधन महसूस करते हैं। घायल भाई तो बहुत बड़ी बात है, घायल साथी की रक्षा के लिए भी अपनी जान की बाजी लगा देते हैं।
- World Animal Protection के अनुसार, टाइगर सुख और दर्द का अनुभव करते हैं।
- Earth Clinic की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि टाइगर सहानुभूति दिखाते हैं। जब कोई घायल हो जाता है तो उसकी सहायता करते हैं।
- Earth Clinic के अनुसार, टाइगर परोपकारी होते हैं। यदि उनका पेट भरा है और उनका कोई रिश्तेदार स्वीकार नहीं कर पा रहा है तो, शिकार में उसकी मदद करते हैं। बदले में कुछ नहीं लेते।
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