भारत की राजनीति में जहाँ कुछ लोग अंतिम संस्कार के लिए दी जाने वाली अनुग्रह राशि में भी अपना प्रचार कर लेते हैं, वहीं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्कूल शिक्षा से पॉलिटिक्स को अलग करने के लिए सीएम राइज स्कूलों के नाम बदलने का ऐलान कर दिया है। उनका कहना है कि शिक्षा के संस्थान सिर्फ शिक्षा के लिए होने चाहिए और उनके नाम से कोई संदेश मिलना चाहिए। इसलिए उन्होंने मध्य प्रदेश के सभी सीएम राइज स्कूलों का नाम बदलकर सांदीपनी स्कूल कर दिया।
सांदीपनी स्कूल से क्या तात्पर्य है, पब्लिक में क्या मैसेज जाएगा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सही मायने में स्कूल चलो अभियान पाँच हजार साल पहले शुरू हो चुका था। तब इन्हें गुरुकुल कहा जाता था और आज ये स्कूल हो गए हैं। श्री कृष्ण ने 11 साल की उम्र में कंस का वध किया था। उसके बाद श्री कृष्ण जी की शिक्षा कराने के लिए उन्हें मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित सांदीपनी आश्रम में भेजा गया था। इसी सांदीपनी आश्रम में सुदामा की मित्रता श्री कृष्ण से हुई थी। यहीं पर श्री कृष्ण को गीता का ज्ञान प्राप्त हुआ था।
मुख्यमंत्री द्वारा सरकारी स्कूलों का नाम सांदीपनी स्कूल रखने से पब्लिक में एक पॉजिटिव मैसेज जाएगा। सबको हमेशा याद रहेगा कि भगवान श्री कृष्ण उज्जैन में पढ़ने के लिए आए थे। उनके गुरुकुल का नाम सांदीपनी आश्रम था। विद्यार्थियों को प्रेरणा मिलेगी कि उन्हें भी भगवान श्री कृष्ण की तरह रिसर्च और डेवलपमेंट पर काम करना चाहिए। जिस प्रकार भगवान श्री कृष्ण ने अपने स्कूल के जीवन में सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए जो रिसर्च की थी, वही बाद में डेवलप होकर श्रीमद्भगवद्गीता बनी। ऐसा कुछ ऐतिहासिक करना चाहिए।
कई महान लोगों के विचार सरकारी स्कूलों में विकसित हुए हैं
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश के स्कूलों से पढ़कर देश की बड़ी-बड़ी विभूतियाँ निकली हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद सरकारी स्कूल से पढ़े हैं। आज वह देश के प्रधानमंत्री होने के साथ ही दुनिया के सबसे बड़े नेता हैं। सरकारी स्कूलों से एपीजे अब्दुल कलाम, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, लाल बहादुर शास्त्री समेत कई बड़ी हस्तियाँ पढ़कर निकली हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में शानदार वातावरण तैयार हुआ है। प्रदेश में उद्योगों का विकास तेजी से हो रहा है। संभाग स्तर पर इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की गई हैं। इनमें मिले 60 प्रतिशत प्रस्तावों पर काम शुरू हो चुका है। भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से प्रदेश को भारी निवेश के प्रस्ताव मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल चलो अभियान के माध्यम से पहली से आठवीं तक के बच्चों को स्कूल भेजने की जो योजना बनाई, वह तारीफ के काबिल है।
1 अप्रैल को पहली से आठवीं के बच्चों के बीच सभाओं का आयोजन होगा।
2 अप्रैल को बच्चों के साथ उनके भविष्य की कल्पना होगी।
3 अप्रैल को सांस्कृतिक गतिविधियों के आधार पर गौरवशाली इतिहास के बारे में बताया जाएगा।
4 अप्रैल को स्कूल छोड़ चुके बच्चों को पुनः स्कूल में लाने का काम किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा...
- हमारी सरकार ने 12वीं में 75% अंक लाने वाले 90 हजार विद्यार्थियों को 224 करोड़ की लागत से लैपटॉप देने का काम किया।
- 12वीं में टॉप करने वाले 7832 बच्चों को स्कूटी देने का काम किया।
- स्कूल में पढ़ने वाले 4.75 हजार विद्यार्थियों को साइकिल देने का काम किया।
- इस साल स्कूल शुरू होने के साथ ही किताब-कॉपी दी जा रही है।
- हमारी सरकार ने 85 लाख से अधिक विद्यार्थियों को कॉपी-किताब देने का काम किया।
- सुपर 100 विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग प्रकार की कोचिंग क्लास चलाई हैं।
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