MPPSC का अंधा बाइक चलाता है, लंगड़े डांस करते हैं, आयोग जांच नहीं करता, पढ़िए Bhopal Samachar

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग इंदौर अपने आप में एक गजब संस्था है। इसकी कभी कोई गलती नहीं होती। पेपर गलत हो तो पेपर बनाने वाले की गलती। उत्तर गलत हो जाए तो ऑनलाइन पेपर करवाने वाली एजेंसी की गलती। नियुक्ति गलत हो जाए तो डिपार्टमेंट की गलती। एमपीपीएससी सिर्फ टाइम टेबल जारी करता है और उसके लिए भी जिम्मेदार नहीं होता क्योंकि हर टाइम टेबल के साथ "टेंटेटिव" लिखा होता है। जबकि हालत यह हो गई है कि एमपीपीएससी से सेलेक्ट होकर नौकरी करने वाला अंधा कार चला रहा है। लंगड़े डांस कर रहे हैं, और बहरों को तो पकड़ ही नहीं सकते क्योंकि कान कितना सही है, यह जांच करने के लिए मध्य प्रदेश में कोई मशीन ही नहीं है। 

4 फरवरी को अंधा हुआ, बिना मदद के पेपर दिया, पोस्टिंग भी आबकारी विभाग में मिली 

मध्य प्रदेश शासन के आबकारी विभाग में, एमपीपीएससी से परीक्षा पास करके नियुक्ति के लिए आने वाले उम्मीदवारों की जांच में गड़बड़ी के कई मामले सामने आ चुके हैं। ताजा मामला सागर के रहने वाले सत्यम रजक का है। इसी साल 18 जनवरी को MPPSC 2022 का रिजल्ट जारी हुआ। उसमें सागर के रहने वाले सत्यम रजक का दिव्यांग कोटे से आबकारी सब इंस्पेक्टर के तौर पर चयन हुआ है। उज्जैन के रहने वाले प्रिंस यादव ने सत्यम रजक के सिलेक्शन पर सवाल उठाए हैं। यादव का कहना है कि या तो सत्यम का ड्राइविंग लाइसेंस गलत है या फिर एग्जाम के लिए दिया दृष्टिबाधित सर्टिफिकेट। 

ड्राइविंग लाइसेंस पुराना है, आंखें बाद में खराब हुई

एमपीपीएससी 2022 के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 9 फरवरी 2023 थी। सत्यम रजक का दृष्टिबाधित सर्टिफिकेट 4 फरवरी 2023 को जारी हुआ है। यहां समझ में तो आता है कि फिक्सिंग हुई है। सब कुछ तय हो जाने के बाद सर्टिफिकेट बनवाया गया परंतु इसे साबित नहीं किया जा सकता। ड्राइविंग लाइसेंस भी 2017 में बना था इसलिए ड्राइविंग लाइसेंस पर भी डाउट नहीं किया जा सकता। केवल एक चीज है जहां गड़बड़ी पकड़ में आती है। अप्रैल 2024 में उन्होंने गाड़ी ड्राइव करते हुए अपना फोटो अपनी ही सोशल मीडिया पर अपलोड किया है। 

मोबाइल फोन चुगली कर देगा, सीसीटीवी गवाही देगा

सोशल मीडिया से यह तो नहीं पता चला की फोटो नया है या पुराना परंतु यदि सत्यम रजक का मोबाइल जप्त कर लिया जाए। या फिर वह मोबाइल जिसमें यह फोटो कैप्चर किया गया है, उसकी फोरेंसिक जांच की जाए तो पता चल जाएगा की फोटो किस तारीख को कैप्चर किया गया है। और फिर ट्रैफिक पुलिस के सीसीटीवी कैमरे भी तो है। सबसे बड़ी बात यह है कि, दृष्टिबाधित उम्मीदवार को परीक्षा देने के लिए एक असिस्टेंट की सुविधा मिलती है। सत्यम रजक ने बिना किसी मदद के परीक्षा दी है। परीक्षा हॉल की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग है। 

आयोग के इनोसेंट पूर्व अध्यक्ष का बयान पढ़िए

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग में पूर्व अध्यक्ष भी सिस्टम की गड़बड़ी को छुपाने की कोशिश करते हैं। मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन प्रो. एसपी गौतम ने पत्रकार श्री योगेश पांडे से कहा कि, जिस विभाग के लिए कैंडिडेट का चयन हुआ है, वह विभाग उसके दिव्यांग सर्टिफिकेट की जांच करा सकता है। इसमें ये वेरिफाई हो जाएगा कि वह व्यक्ति दिव्यांग कैटेगरी से भर्ती के लिए पात्र है या नहीं? यदि फर्जी सर्टिफिकेट लगाया है तो उसकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है।

एमपीपीएससी वालों की आंख में कौन सा मोतियाबिंद हुआ था

सवाल यह है कि सर्टिफिकेट की जांच एक विकल्प क्यों है अनिवार्य क्यों नहीं है। यह काम डिपार्टमेंट पर क्यों छोड़ा जाता है। एमपीपीएससी क्यों नहीं करता। एमपीपीएससी की तो स्थापना ही निष्पक्षता के लिए हुई है। फिर पक्षपात का कोई भी मौका शेष क्यों छोड़ दिया जाता है। सिस्टम में सुराख क्यों है। रही आबकारी विभाग की बात तो उनका पक्ष आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव से मांग लेंगे। गौतम साहब को एमपीपीएससी का पक्ष बताना चाहिए था। सवाल सिर्फ इतना सा है कि जब एक अंधा कैंडिडेट बिना किसी की मदद के टपाटप पेपर दे रहा था। तब एमपीपीएससी वालों की आंख में कौन सा मोतियाबिंद हुआ था। यदि एमपीपीएससी वाले परीक्षा कक्ष के भीतर होने वाली गड़बड़ी को भी नहीं पकड़ सकते हैं तो ऐसे बाबू टाइप संस्थान की जरूरत ही क्या है। 

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