NEHA MARVYA IAS की जांच रिपोर्ट पर वरिष्ठ IFS ललित मोहन बेलवाल के खिलाफ मामला दर्ज

भारतीय प्रशासनिक सेवा की महिला अधिकारी नेहा मारव्या के लिए लंबे समय के बाद राहत भरी खबर आई है। जिस जांच के कारण उन्हें कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ा आज इस जांच के आधार भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी ललित मोहन बेलवाल के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा मामला दर्ज कर लिया गया है। प्राथमिक जांच में ललित मोहन को भ्रष्टाचार का दोषी पाया गया है। 

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ललित मोहन बेलवाल, विकास अवस्थी एवं सुषमा रानी शुक्ला के खिलाफ मामला दर्ज

यह भर्ती घोटाला तीन साल पहले उजागर हुआ था, जिसकी जांच आईएएस नेहा मारव्या ढाई साल पहले सरकार को सौंप चुकी थीं। जांच रिपोर्ट में आजीविका मिशन में हुए भर्ती घोटाले के लिए तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी ललित मोहन बेलवाल को दोषी बताया गया था। इसके बाद मंत्रालय स्तर पर जांच रिपोर्ट दबी रही। पिछले महीने शिकायतकर्ता राजेश मिश्रा ने आजीविका मिशन में हुए भर्ती घोटाले की ईओडब्ल्यू में शिकायत की। इसके बाद मिशन के तत्कालीन सीईओ ललित मोहन बेलवाल, उपायुक्त विकास अवस्थी एवं सुषमा रानी शुक्ला के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। 

शिवराज सरकार घोटाले का नाम भी नहीं सुनना चाहती थी

दर्ज हुए मामले के अनुसार, आजीविका मिशन में वर्ष 2015 से 2018 के बीच राज्य, जिला एवं ब्लॉक स्तर पर नियुक्तियां की गईं थीं। सुषमा रानी शुक्ला को राज्य परियोजना प्रबंधक बना दिया गया था। इन तमाम नियुक्तियों में मध्य प्रदेश शासन के निर्धारित नियमों का उल्लंघन किया गया। उस समय ललित मोहन बेलवाल, आजीविका मिशन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी थे। इस भर्ती घोटाले का खुलासा शिवराज सिंह सरकार में ही हो गया था परंतु मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के दामन पर दाग न लग जाए, इसलिए मामले को दबा दिया गया। व्यापम घोटाला झेल चुकी सरकार, अब घोटाले का नाम भी नहीं सुनना चाहती थी। 

नेहा मारव्या ने पूरा घोटाला खोल डाला

शिकायतकर्ता भूपेन्द्र प्रजापति की शिकायत पर मध्य प्रदेश शासन ने आईएएस नेहा मारव्या से जांच कराई। स्पष्ट तो नहीं हो पाया है लेकिन शायद, यह उद्देश्य रहा होगा कि नेहा मारव्या लंबे समय तक जांच करती रहेगी या फिर शिकायतकर्ता भूपेंद्र प्रजापति को हाथ उत्साहित कर देगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। उल्टा नेहा ने जांच में वह सब कुछ भी उजागर कर दिया, जिसकी शिकायत तक नहीं की गई थी। करीब 264 पेज की जांच रिपोर्ट में मिशन के सीईओ बेलवाल समेत अन्य पर आरोप तय किए। सुषमा रानी शुक्ला की जांच को नियम विरुद्ध बताया। नेहा ने जून 2022 में जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी। 

नेहा मारव्या को लूप लाइन में भेज दिया गया 

नेहा मारव्या ने अपने वरिष्ठ अधिकारी के संकेत को नहीं समझा। मामले को पेंडिंग करने की बजाय फटाफट जांच कर डाली और हर बात का खुलासा कर दिया। इसलिए नेहा मारव्या कुछ शाबाशी देने के बजाय लूप लाइन में भेज दिया गया। कहा जाता है कि ललित मोहन बेलवाल पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस के करीबी हैं। इस वजह से नेहा मारव्या की जांच रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। 

पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल कमेटी बनाकर पेंडिंग कर दिया

जब मामला उच्च न्यायालय गया तो विभाग ने सही तथ्य नहीं रखे। इस बीच 2023 में सरकार बदली। जैसे ही नेहा मारव्या की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई करने का मामला पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल के पास पहुंचा तो, उन्होंने संचालक पंचायत मनोज पुष्प की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर दी। करीब 15 महीने तक पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने कोई निर्णय नहीं लिया।

पिछले महीने मामला ईओडब्ल्यू पहुंचा। जांच एजेंसी ने प्रकरण दर्ज कर लिया है। फर्जी बीमा, मशीन खरीदी घोटाला भी आएगा ईओडब्ल्यू ने अभी नियुक्ति मामले में प्रकरण दर्ज किया है। जल्द ही महिला स्व सहायता समूहों की महिलाओं का फर्जी बीमा और अगरबत्ती मशीन खरीदी घोटाले में भी एफआईआर होगी। शिकायतकर्ता भूपेन्द्र प्रजापति के अनुसार बेलवाल के समय समूहों की महिलाओं ने बीमा के नाम पर करीब 70-80 करोड़ रुपए वसूले, इस राशि का कोई हिसाब नहीं है। करीब 367 अगरबत्ती मशीन खरीदी में भी घोटाला किया गया था। 

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