भोपाल, 22 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में किसानों एवं जागरूक नागरिकों का समूह आमने-सामने आ गए हैं। एक तरफ किस तालाब की सराउंडिंग जमीन पर खेती का अधिकार मांग रहे हैं तो दूसरी तरफ पब्लिक का कहना है कि, भोपाल के तालाब और हरियाली का हर हाल में संरक्षण होना चाहिए। दोनों को भोपाल के मास्टर प्लान 2047 से आपत्ति है। किसानों का कहना है कि, मास्टर प्लान में उनकी खेती की जमीन तालाब को दे दी गई जबकि पब्लिक का कहना है कि, तालाब के लिए जितनी जमीन की जरूरत थी, उतनी आरक्षित नहीं की गई।
अरेरा से भेल तक के लोगों ने लिखित आपत्ति दर्ज करवाई
गुरुवार को संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) कार्यालय पहुंचे और ड्राफ्ट के खिलाफ हजारों आपत्तियां दर्ज कराईं। अरेरा कॉलोनी, साकेत नगर, बावड़िया, रोहित नगर, शाहपुरा, कोलार रोड, गौतम नगर, नेहरू नगर, भेल और अन्य क्षेत्रों के रहवासियों ने भोपाल के तालाबों, जंगलों, वन्यजीवों और हरित क्षेत्रों के संरक्षण को लेकर चिंता जताई। उन्होंने ड्राफ्ट में अवैध भू-उपयोग और अनधिकृत निर्माणों को नियमित करने की संभावनाओं पर भी आपत्ति उठाई।
रहवासियों की मांग है कि आवासीय क्षेत्रों का मूल स्वरूप सुरक्षित रखा जाए और अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को नियमित करने पर रोक लगाई जाए। इसके साथ ही स्वीकृत अभिन्यास के अनुसार पार्कों और खुले स्थानों का संरक्षण, फुटपाथ, पार्किंग और सड़क सुविधाओं का विकास सुनिश्चित किया जाए।
समिति ने बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र, हरित क्षेत्रों और टाइगर मूवमेंट क्षेत्र में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले निर्माण संबंधी प्रावधानों पर पुनर्विचार करने की मांग भी की है।
रहवासियों का कहना है कि भोपाल का विकास पर्यावरण संरक्षण, नागरिकों के जीवन के अधिकार और कानून के पालन को प्राथमिकता देकर होना चाहिए। उन्होंने विभाग से सभी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार करने, व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देने और नियमानुसार स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की है।

