भोपाल, 15 अक्टूबर 2026: दिनांक 3 दिसंबर 2024 को भोपाल में हुए विनीता-मेघा मर्डर कांड में मध्य प्रदेश पुलिस के बर्खास्त ASI को भोपाल की कोर्ट ने डबल उम्र कैद की सजा सुनाई है। विनीता और मेघा दोनों सगी बहनें थी। असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर मंडला से प्राइवेट टैक्सी लेकर आया और दोनों का मर्डर करके फरार हो गया था। 2 साल से कम समय में इस मामले में फैसला आ गया।
योगेश मरावी मंडला जिले के मवई थाने में एएसआई था। उसने 3 दिसंबर 2024 की सुबह 11 बजे पत्नी विनीता (35) और खादी ग्रामोद्योग विभाग की वित्त लेखाधिकारी साली मेघा उइके (30) की चाकू से गोदकर हत्या की थी। मेघा के पेट, कमर और प्राइवेट पार्ट के बेहद करीब चाकू से कुल 56 वार किए थे। वहीं, विनीता के प्राइवेट पार्ट के बायीं तरफ करीब एक इंच दूर गहरा घाव मिला है। उसकी बॉडी पर कुल 16 घाव थे। उसका प्लान पत्नी की जान-पहचान वाले एक ASI की हत्या के बाद खुदकुशी करने का था। उसे शक था कि पत्नी और उस ASI के बीच प्रेम संबंध थे। 3 दिसंबर 2025 की शाम को ही उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।
विनीता मरावी का अपने पति योगेश से विवाद चल रहा था। वह उसे तलाक देना चाहती थी। इसी के चलते विनीता अपनी बहन मेघा उइके के साथ भोपाल में सुभाष नगर स्थित सिमी अपार्टमेंट में किराए के फ्लैट में रहती थी। 3 दिसंबर 2024 की सुबह करीब 11 बजे योगेश की पत्नी विनीता ने मेड के लिए दरवाजा खोला। इसी दौरान बाहर मौजूद योगेश, मेड को धक्का देकर अंदर घुस गया। उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और चाकू से ताबड़तोड़ पत्नी-साली पर वार किए। यह देखकर मेड वहां से भागी और पड़ोसियों को जानकारी दी। फिर डायल 100 पर फोन लगाया। वारदात को अंजाम देने के बाद योगेश घर का दरवाजा बाहर से बंदकर फरार हो गया।
वारदात को अंजाम देने के लिए आरोपी योगेश मरावी मंडला से एक निजी गाड़ी किराये पर लेकर भोपाल आया था। दोनों महिलाओं की हत्या करने के बाद वह उसी गाड़ी से फरार हो गया था। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी की तलाश की गई। हत्याकांड की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घटनाक्रम और आरोपी की गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की जांच की। अधिवक्ता सुधा भदौरिया ने बताया की योगेश मरावी और उसकी पत्नी विनीता के बीच नौकरी करने और आत्मनिर्भर बनने को लेकर विवाद चल रहा था। विनीता की बहन मेघा भी उसे अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए प्रोत्साहित करती थी। इसी पारिवारिक विवाद के बीच 3 दिसंबर 2024 को यह सनसनीखेज वारदात हुई।
विशेष न्यायाधीश सुचिता श्रीवास्तव की अदालत ने गुरुवार दोपहर को फैसला सुनाया। मामले में करीब 16 महीने तक सुनवाई चली। पुलिस की ओर से 11 गवाह पेश किए गए। तकनीकी सबूतों में मौका-ए-वारदात के सीसीटीवी फुटेज भी शामिल थे। वारदात के बाद ASI मरावी को बर्खास्त कर दिया गया था। वह जेल में था।

