भ्रष्टाचार के मामले में सीहोर की महिला अधिकारी, किसानों को तंग करने वाले राजगढ़ के अधिकारी को नोटिस

Updesh Awasthee
भोपाल, 14 अक्टूबर 2026:
भोपाल संभाग के कमिश्नर श्री कर्मवीर शर्मा ने प्रशासनिक लापरवाही और अवचार के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए दो अलग-अलग अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार किया है। एक मामले में सीहोर जिले की इछावर महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी सुश्री गरिमा वाईकर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, वहीं दूसरे मामले में राजगढ़ के तत्कालीन जिला विपणन अधिकारी बब्बन मौर्य का प्रकरण अंतिम कार्रवाई के लिए राज्य शासन को भेज दिया गया है।

इछावर की परियोजना अधिकारी गरिमा वाईकर पर कार्रवाई

संभाग आयुक्त श्री कर्मवीर शर्मा द्वारा सीहोर जिले के आकस्मिक निरीक्षण के दौरान इछावर महिला एवं बाल विकास परियोजना में पदस्थ परियोजना अधिकारी सुश्री गरिमा वाईकर के विरुद्ध मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 16 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव रखा गया है। 

जारी सूचना पत्र के अनुसार, संबंधित अधिकारी पर अवचार एवं कदाचरण से संबंधित आरोप लगाए गए हैं। सुश्री वाईकर को अपना पक्ष रखने का अवसर देते हुए निर्देशित किया गया है कि वे सूचना पत्र मिलने के 10 दिवस के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करें। निर्धारित समय-सीमा में जवाब प्राप्त न होने पर यह माना जाएगा कि उन्हें अपने बचाव में कुछ नहीं कहना है और शासन के नियमानुसार आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

पूर्व जिला विपणन अधिकारी बब्बन मौर्य का प्रकरण शासन को भेजा गया

दूसरे मामले में, संभाग आयुक्त ने राजगढ़ के तत्कालीन जिला विपणन अधिकारी बब्बन मौर्य (वर्तमान में झाबुआ जिले में स्थानांतरित) के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव प्रमुख सचिव, सहकारिता विभाग (मध्य प्रदेश शासन) को प्रेषित किया है।

बब्बन मौर्य पर खाद वितरण में लापरवाही बरतने, वितरण केंद्रों की मॉनीटरिंग न करने, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना करने तथा शासकीय बैठकों से बिना पूर्व सूचना अनुपस्थित रहने के आरोप हैं। खाद वितरण में अव्यवस्थाओं और किसानों को यूरिया न मिलने से उत्पन्न सड़क जाम (चक्काजाम) की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर राजगढ़ ने उनके विरुद्ध कार्रवाई का प्रस्ताव संभाग आयुक्त को भेजा था। जारी आरोप-पत्रों एवं आरोप-ज्ञापनों का निर्धारित समय-सीमा में संतोषजनक जवाब न देने के कारण अब यह मामला अंतिम निर्णय व कार्रवाई हेतु सहकारिता विभाग को सौंप दिया गया है।

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